हमारे प्रदेश के सीएम साहब कितनी भी घोषणा कर वाह वाही लूटे लेकिन उनकी घोषणाओ की हवा निकालने में विपक्ष की जरूरत नहीं होती। नगर निगम के आलाधिकारियों से लेकर नगर सरकार के नुमाइंदे ही काफी हैं। कुछ समय पहले प्रवास पर आए मुख्यमंत्री ने एक जुलाई से प्रतिदिन पानी मिलने की मंच से घोषणा कर वाह वाही लूटी थी लेकिन इस घोषणा के एक साल पूरे होने पर भी जनता को हर दिन पानी नही मिला और अब मुख्यमंत्री जी की उक्त घोषणा सोशल मीडिया पर वायरल हो कर मज़ाक के रूप में देखा जाने लगा है जो सुर्खियों में है। हाल ही में मुख्यमंत्री जी की दूसरी घोषणा की फिर प्रथम नागरिक की मेयर इन कौंसिल ने फिर हवा निकाल दी है। एक साल पहले नगर निकाय चुनाव के समय मुख्यमंत्री ने सड़क या फुटपाथ पर बैठकर व्यापार करने वालो को राहत देते हुए प्रतिदिन लिए जाने वाले शुल्क को माफ करने का वचन दिया था। लेकिन सीएम साहब के वचन की नगर सरकार की एमआईसी ने बैठक कर एक अगस्त से ठेलो और फुटपाथ पर कारोबार करने वालो से वसूली करने का निर्णय लेकर कहा है कि यह वसूली ठेका प्रथा पर नही नगर निगम के कर्मचारी ही करेंगे। शहर में करीब पांच हजार ऐसे व्यापारी है जो छोटा व्यापार कर परिवार पाल रहे है। नगर सरकार की एमआईसी के निर्णयों से ऐसा लगता है चुनाव में फुलछाप को बिखेरने में विपक्ष को कोई मुद्दे ढूंढने नही पड़ेगे, फूलछाप ही सब हिसाब चुकता कर देंगे ? इन निर्णयों से ऐसा लगने लगा है कि मुख्यमंत्री की घोषणाओं के सामने प्रथम नागरिक और उनकी टीम ही भारी है….?

सुविधा शुल्क में हो गुणवत्ता..?
शहर में विकास कार्य तेजी से चल रहा है, टेंडर होते ही वर्क ऑर्डर मिलते ही काम शुरू हो जाता है जिससे जनता संतुष्ट रहे की काम हो रहा है फिर भले ही बिल की गणित में काम रुक जाए । चाय की एक दुकान पर कुछ ठेकेदार और एक सेवानिवृत अधिकारी चाय पर चर्चा करते हुए विकास कार्यों की पर गुणवत्ता की बात करते रहे है। काम कमजोर होने पर जब चर्चा हुई तो एक ठेकेदार बोल पड़ा अरे साहब आप तो अब जानते हो सुविधा शुल्क में किस स्तर की गुणवत्ता मांगते हैं। किस किस को देना पड़ता है, ऐसे में निर्माण कार्यों में कैसे गुणवत्ता हो सकती है। कितने ही ठेकेदार अब काम करने से मना करने लगे हैं, ठेकेदार अपनी तकलीफ किसे बताए….?
यह कैसी जागरूकता..?
रतलाम में विकास कार्य की रफ्तार की आड़ में सैकड़ों हरे भरे वृक्षों की कटाई और मूक परिंदो की मौत गत दिनों सुर्खियों में रही पेड़ो की कटाई को लेकर निगम के आलाधिकारी भी अनुमति के नाम पर गुमराह करते रहे, बाद में जांच की आड़ में दबी जुबान से अनुमति नहीं देने की बात सामने आई लेकिन अब तक नामजद आरोपी के खिलाफ एफ आई आर नही हो सकी । जैसे तैसे इस प्रकरण को शांत किया जा रहा था कि नगर निगम फिर लॉ कॉलेज परिसर में काटे गए पेड़ो को लेकर दंड शुल्क का नोटिस जारी कर दिया , जो अंगूठा कटवा कर शहीद होने के समान ही है।
