
आलोट ( जीतू ivnews )रिश्ते सिर्फ इंसानों के बीच ही नहीं होते, कई बार बेजुबान जानवर भी परिवार का ऐसा हिस्सा बन जाते हैं, जिनसे बिछड़ने का दर्द शब्दों में बयां करना मुश्किल होता है। मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के गुराड़िया गांव में ऐसा ही एक भावुक मामला सामने आया है, जहां एक परिवार ने अपने पालतू खरगोश डुग्गू को बेटे की तरह पाला और उसकी मौत के बाद इंसानों की तरह उसकी ग्यारहवीं की रस्म निभाकर पूरे गांव को मृत्यु भोज कराया।
किसान सुजान सिंह चौहान और उनके परिवार ने वर्षों पहले डुग्गू को अपने घर लाया था। इस परिवार के मुताबिक, डुग्गू धीरे-धीरे उनके जीवन का हिस्सा बन गया। उसकी देखभाल भी परिवार के किसी सदस्य की तरह की जाती थी। घर में उसकी मौजूदगी सभी के लिए खास थी।
बीते कुछ समय से डुग्गू बीमार चल रहा था। करीब 11 दिन पहले उसकी अचानक मौत हो गई। परिवार के लिए यह महज एक पालतू पशु को खोना नहीं, बल्कि परिवार के एक सदस्य के बिछड़ने जैसा था। डुग्गू की मौत के बाद घर में शोक का माहौल छा गया।
ग्यारहवीं पर गांव को कराया भोजन
डुग्गू की याद को हमेशा जीवित रखने के लिए सुजान सिंह ने उसकी ग्यारहवीं पर कार्यक्रम आयोजित किया। परिवार ने डुग्गू की स्मृति में चबूतरा (ओटला) बनवाया और ग्रामीणों को आमंत्रित कर भोजन कराया।
इस अनोखी श्रद्धांजलि को देखने और डुग्गू को याद करने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण भी पहुंचे। एक मूक पशु के प्रति परिवार का यह लगाव पूरे गांव में चर्चा का विषय बन गया।
बेटे की तरह पाला था
सुजान सिंह ने भावुक होकर बताया कि डुग्गू को उन्होंने बच्चे की तरह पाला था। अचानक उसकी मौत से उन्हें गहरा दुख हुआ। इसी भावना के चलते उन्होंने उसकी ग्यारहवीं का कार्यक्रम रखा, चबूतरा बनवाया और गांव के लोगों को भोजन कराया।
उन्होंने कहा कि उनके मन में डुग्गू के लिए हमेशा परिवार के बच्चे जैसी ही भावना रही और इसी कारण उसकी विदाई भी उसी भाव से करना चाहते थे।
पशु प्रेम की मिसाल बनी कहानी
पंचायत सदस्य सुरेंद्र राठौर ने बताया कि सुजान सिंह ने डुग्गू को बचपन से ही बच्चे की तरह पाल-पोसकर बड़ा किया था। उसकी अचानक मृत्यु के बाद सुजान सिंह ने उसे अपने बेटे के समान मानते हुए ग्यारहवीं का कार्यक्रम आयोजित किया और गांव में भोजन कराया।
गुराड़िया गांव की यह घटना बताती है कि प्यार और अपनापन किसी भाषा या प्रजाति का मोहताज नहीं होता। डुग्गू अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसकी याद में बनाया गया चबूतरा और उसके नाम पर कराया गया सामूहिक भोज लंबे समय तक गांव में पशु प्रेम की एक भावुक मिसाल के रूप में याद किया जाएगा।
