रतलाम। सांस्कृतिक परिदृश्य केवल साहित्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक, आर्थिक और वैचारिक सभी पक्ष शामिल होते हैं। जब इन पक्षों की उपेक्षा या उन्हें दबाने का प्रयास होता है, तो उसका सीधा प्रभाव समाज के सांस्कृतिक परिवेश पर पड़ता है। ऐसे समय में साहित्यिक संगठनों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। साहित्य और रचनात्मकता के माध्यम से सामाजिक चेतना को मजबूत करते हुए निराशा के वातावरण को सकारात्मक दिशा दी जा सकती है।
यह विचार सुप्रसिद्ध कवि एवं जनवादी लेखक संघ की केंद्रीय इकाई के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश जोशी ने जनवादी लेखक संघ मध्यप्रदेश राज्य सम्मेलन के शुभारंभ अवसर पर आयोजित वैचारिक सत्र में व्यक्त किए।
राजेश जोशी ने कहा कि संस्कृति अनेक घटकों से मिलकर बनती है और ये सभी घटक समाज के विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए इनका मजबूत होना आवश्यक है। लोकतंत्र के आधार स्तंभ मजबूत होंगे, तभी लोकतंत्र भी मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि साहित्यिक संगठन अपनी वैचारिक सक्रियता और रचनात्मक कार्यों के माध्यम से मजबूत सांस्कृतिक परिदृश्य के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
बहुलतावादी संस्कृति हमारी धरोहर
लखनऊ से आए कवि एवं जनवादी लेखक संघ केंद्रीय महासचिव नलिनरंजन सिंह ने कहा कि भारत की बहुलतावादी संस्कृति हमारी महत्वपूर्ण धरोहर है। हमारी संस्कृति और सांस्कृतिक मूल्यों की लगातार उपेक्षा की जा रही है। समाज का ताना-बाना जिन मूल्यों पर टिका है, उन्हें क्षति पहुंचना गंभीर विषय है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में साहित्यिक संगठनों को और अधिक सक्रिय भूमिका निभानी होगी। साहित्य को समाज के सामने सही पक्ष और वास्तविक संवेदनाओं को मजबूती से रखने का कार्य करना होगा।
सांस्कृतिक संकटों की पड़ताल जरूरी
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मध्यप्रदेश जनवादी लेखक संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र जैन ने कहा कि आज सांस्कृतिक संकट गहरे होते जा रहे हैं, जिनकी गंभीर पड़ताल आवश्यक है। समाज अपनी मूल प्रवृत्तियों और मूल्यों से दूर होता जा रहा है, जो चिंता का विषय है।
स्वागत उद्बोधन में जनवादी लेखक संघ रतलाम के अध्यक्ष यूसुफ़ जावेदी ने कहा कि रतलाम की समृद्ध साहित्यिक परंपरा में यह आयोजन एक महत्वपूर्ण कड़ी जोड़ेगा। ऐसे आयोजन शहर के साहित्यिक और सांस्कृतिक परिवेश को और समृद्ध करते हैं।
दो पुस्तकों का हुआ विमोचन
सम्मेलन के दौरान कवि रणजीत सिंह राठौर की पुस्तक ‘वेदना के स्वर’ तथा इन्दु सिन्हा के कहानी संग्रह ‘अम्मा शहर में तथा अन्य कहानियां’ का अतिथियों द्वारा विमोचन किया गया।
कार्यक्रम में वरिष्ठ कवि रतन चौहान, यूसुफ़ जावेदी, सिद्दीक़ रतलामी, मांगीलाल नगावत, कीर्ति शर्मा, कला डामोर, ओमप्रकाश मिश्र, डॉ. एन.के. शाह, विनोद झालानी, आई.एल. पुरोहित, डॉ. गीता दुबे, इन्दु सिन्हा, हीरालाल खराड़ी, जितेन्द्र सिंह पथिक, पूजा चोपड़ा, पुष्पलता शर्मा, संजय परसाई ‘सरल’ और सुधीर कुमार मिश्रा सहित अनेक साहित्यकारों ने अतिथियों का स्वागत किया।
इस अवसर पर संजय परसाई ‘सरल’ ने जनगीत की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का संचालन आशीष दशोत्तर ने किया, जबकि आभार सिद्दीक़ रतलामी ने व्यक्त किया।
सम्मेलन में भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, रतलाम, नीमच, अशोकनगर और देवास सहित विभिन्न स्थानों से साहित्यकार एवं साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।

By V meena

You missed

error: Content is protected !!