रतलाम बीएमटी अस्पताल में भर्ती 15 वर्षीय मासूम कैंसर पीड़ित बालक चैतन्य को डब्ल्यूबीसी काउंट की आवश्यकता पड़ी। केस की गंभीरता को देखते हुए अपना सारा काम छोड़कर रात्रि में रतलाम के ग्राम हतनारा निवासी आयुष पाटीदार ने तत्काल देरी ना करते हुए मध्य रात्रि 1 बजे इंदौर पहुंच कर सर्वप्रथम ग्रेटर कैलाश अस्पताल पहुंचे तत्पश्चात वहां रात्रि 02 बजे डब्ल्यूबीसी इंजेक्शन लगवाने चोइथराम अस्पताल पहुंचे। इंजेक्शन लगवाने के बाद सुबह 11:00 बजे अरविंदो अस्पताल पहुंचकर 3 घंटों तक दोनों हाथों में सुई लगवा कर मासूम बच्चे के लिए बिना हिले डब्ल्यूबीसी डोनेशन किया। आयुष पाटीदार द्वारा किया गया डब्ल्यूबीसी डोनेशन रतलाम जिले का प्रथम डब्ल्यूबीसी डोनेशन है।। आयुष की इस अनुकरणीय मिसाल पर समाज सेविका वेणु हरिवंश शर्मा हेल्पिंग हैंड ग्रुप संस्थापक अनिल रावल रक्तवीर दिलीप पाटीदार बोदीना अक्षांश मिश्रा अरुण पटेल नगरा आसिफ खान हर्षित महावर दीपांशु शर्मा दीपक पाटीदार ने उनका आभार व्यक्त किया एवं उत्तम स्वास्थ्य की कामना की।

क्या होता है डब्ल्यूबीसी (WBC) डोनेशन

डब्ल्यूबीसी हमारे शरीर में बीमारियों से लड़ने के लिए जो वाइट ब्लड सेल होते हैं और जब यह कम हो जाते हैं तो हमारे शरीर में बुखार और इन्फेक्शन बढ़ने लगता है। उस बुखार और इन्फेक्शन को कम करने के लिए बोन मेरो ट्रांसप्लांट हुए मरीज को बचाने के लिए इस डोनेशन की आवश्यकता पड़ती है क्योंकि हमारे शरीर में जितनी जरूरत होती है उतनी ही डब्ल्यूबीसी काउंट उपलब्ध होते हैं। इस डोनेशन को करने के लिए एक रात पहले हमें इसको बढ़ाने के लिए इंजेक्शन लगवाना पड़ता है और एक टेबलेट खाना पड़ती है जिससे 12 घंटे में डब्ल्यूबीसी काउंट बढ़ जाते हैं और 12 घंटे के अंतराल में ही इस डोनेशन की प्रक्रिया को करना पड़ता है। जिसमें डोनेशन करने वाले डोनर के दोनों हाथों में निडिल लगा दी जाती है और उसे 3 घंटे तक बिना हीले और बिना पानी पिये यह डोनेशन करना पड़ता है। यह एक बहुत ही जटिल प्रक्रिया है जिसके लिए परिवार भी आगे नहीं आता है पर रक्त वीर सारी चीजों की परवाह किए बिना अपना अमूल्य समय और रक्त दोनों अनजान मरीज के लिए दान करते हैं।।

By V meena

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