
रतलाम। ट्रैन के यात्री एक कोच में टिकट चेकिंग स्टाफ ( टीटीई ) को ट्रेन के यात्रियों ने 4 घण्टे तक बंधक बना ले और ट्रेन इस अवधि मे कई बड़े स्टेशनों से गुजरे लेकिन बंधक बने कर्मचारियों को छुड़ाने के लिए रेल प्रसाशन कुछ न करे । यात्रियों ने ही खुद कर्मचारियों को चार घण्टे बाद छोड़ा । यात्रियों ने तीन टीटीई के खिलाफ लिखित शिकायत की तो टीटीई ने यात्रियों के खिलाफ शिकायत की है।
यह मामला हुआ है अवंतिका एक्सप्रेस में रविवार की रात को। ट्रेन के उज्जैन से चलने के बाद कोच एस 1 ,एस 2 ओर एस 8 में उज्जैन से मुम्बई के लिए यात्रियों का जत्था चढ़ा था। इन यात्रियो का इन कोच में आरक्षण था।लेकिन इन कोच में जनरल कोच में यात्री करने वाले यात्री भी घुस गए। इसे देख इन कोचों के यात्रियों ने आपत्ति उठाई। ट्रैन इस दौरान उज्जैन से चलकर गोधरा तक पहुच गई थीं। इस ट्रेन में रतलाम से कंडक्टर लल्लू राम वर्मा, सहित दो टीटीई धीरज हार्डिया ओर सुनील मीणा की रतलाम से बड़ोदरा तक डयूटी थी। गोधरा स्टेशन के बाहर आउटर पर ट्रेन की चेन पुलिंग हुई। यह चेन पुलिंग एस 1 कोच से हुई। इसके बाद कोच एस 2 से फिर चेन पुलिंग हुई। किसी तरह ट्रैन को यहां से गोधरा स्टेशन पर लाया गया। यहाँ से जब ट्रेन चलने लगी तो फिर कोच एस 8 से फिर चेन पुलिंग हुई। तब टीटीई सुनील मीणा ओर धीरज हार्डिया कोच में पहुचे तो जनरल यात्रियो से नाराज कोच के आरक्षित यात्रियो ने दोनों टीटीई को अपने पास बिठा लिया। तब दोनों टीटीई ने ट्रैन के कंडक्टर लल्लू राम वर्मा को बुलाया। जब कंडक्टर कोच एस 8 में पहुचे तो यात्रियो ने उनको भी अपने पास बिठा लिया। इन टीटीई ने इसकी सूचना कंट्रोल को दी ओर पूरे मामले से अवगत कराया। ट्रैन जब बड़ोदरा पहुची तो इनकी सहायता के लिए पहुंचे आरपीएफ ओर जी आरपी के दो जवानों को भी यात्रियो ने उतरने नहीं दिया। ओर उनको भी टीटीई के साथ बिठा लिया। रतलाम के चेकिंग स्टाफ को बड़ौदा उतरना था। लेकिन उन्हें वलसाड स्टेशन तक ले गए। वहां बमुश्किल उतरने दिया गया। यह सारी समस्या ट्रेनों में स्लीपर व जनरल कोच कम कर ऐसी कोच बढ़ाए जाने से आ रही है।
इस घटना की शुरुआत उज्जैन व रतलाम स्टेशन के बाद से ही शुरू हो गई थी। रतलाम के बाद ट्रेन के स्लीपर कोच एस-8 में बड़ी संख्या में जनरल यात्री घुस आए। इससे कंफर्म बर्थ के यात्रियों ने आपत्ति जताई। सुनवाई नहीं हुई तो यात्री ने चेन पुलिंग कर हंगामा खड़ा कर दिया। इस पर टीटीई सुनील मीणा और धीरज हार्डिया ने यात्रियों को समझाया। बाद में दोनों टीटीई ने कंडक्टर लल्लू राम वर्मा को फ़ोन कर बुलाया। कहासुनी के बाद जब हंगामा बड़ा तो चेकिंग स्टाफ ने रतलाम सीएमआई कंट्रोल और आरपीएफ कंट्रोल को कॉल किया। हालांकि कई बार कॉल करने पर भी रिसीव नहीं किया। ट्रेन भरूच स्टेशन पहुंची। तब वहां 2 आरपीएफ जवान पहुंचे। लेकिन हंगामा देख वे कोच के बाहर से ही रवाना हो गए।
गुस्साए करीब 50 यात्रियों ने तीनों चेकिंग स्टाफ कर्मचारियों को जकड़े रखा तथा उन्हें ट्रेन से उतरने नहीं किया। भरुच में आरपीएफ के 2 व जीआरपी के 2 जवान आए। आक्रोशित यात्रियों ने उनको भी कोच में बैठा लिया व उतरने नहीं दिया। ट्रेन जब सूरत पहुंची तब जीआरपी स्टॉफ आया। यात्रियों ने तीनों टीटीई के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज करा दी कि इन्होंने जनरल कोच के यात्रियों को स्लीपर में बिठाया है। उसके बाद टीटीई को वलसाड स्टेशन पर उतरने दिया। वहां उतरकर टीटीई ने यात्रियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज करवाया। बंधक बनाए गए तीनो टीटीई सोमवार की दोपहर को ट्रैन द्वारा भड़ूच से रतलाम आये।
