रतलाम (IVNEWS)।
सपने देखने के लिए सुविधाओं की नहीं, हौसले की जरूरत होती है। और जब हौसले के साथ मेहनत और परिवार का विश्वास जुड़ जाए, तो कठिन परिस्थितियां भी सफलता की राह नहीं रोक पातीं। खाचरौद की पूजा चौहान की कहानी इसी संघर्ष, संकल्प और सफलता की मिसाल है।
पूजा के पिता राजू चौहान मोटरसाइकिल पर सामान लादकर गांव-गांव फेरी लगाकर अपना परिवार चलाते हैं। सुबह करीब 5 बजे, जब अधिकांश लोग अपने घरों में दिन की शुरुआत का इंतजार कर रहे होते हैं, राजू चौहान अपनी मोटरसाइकिल पर सामान लेकर गांवों की ओर निकल पड़ते हैं। दिनभर मेहनत कर जो आमदनी होती है, उसी से परिवार की जरूरतें पूरी करने के साथ बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी उठाया जाता रहा।
एक पिता की सुबह गांवों की गलियों में संघर्ष करते हुए शुरू होती रही, तो दूसरी ओर बेटी की सुबह किताबों के साथ।
पिता के संघर्ष को बनाया अपनी ताकत
पूजा चौहान ने खाचरौद के मॉडल स्कूल से 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की। बचपन से ही डॉक्टर बनने का सपना देखने वाली पूजा ने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए रतलाम के Abhyas Career Institute में एक वर्ष तक NEET की तैयारी की।
परिवार की आर्थिक परिस्थितियां भले ही चुनौतीपूर्ण थीं, लेकिन पूजा ने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया। नियमित अध्ययन, अनुशासन और लगातार मेहनत के दम पर उसने NEET की तैयारी की और आखिरकार उसकी मेहनत रंग लाई।
पूजा का चयन MBBS पाठ्यक्रम के लिए Government Medical College (GMC), Ratlam में हुआ है।
बेटी की सफलता में पिता के संघर्ष की जीत
पूजा की यह उपलब्धि केवल एक मेडिकल सीट हासिल करने की कहानी नहीं है। इसके पीछे उस पिता का संघर्ष भी है, जिसने अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए वर्षों तक गांव-गांव घूमकर मेहनत की।
मोटरसाइकिल पर सामान लादकर फेरी लगाने वाले राजू चौहान ने अपनी मेहनत की कमाई से बच्चों की पढ़ाई जारी रखी। किताबों से लेकर पढ़ाई से जुड़े खर्च तक, सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता दी।
आज उसी मेहनत का परिणाम है कि उनकी बेटी पूजा GMC रतलाम में MBBS की पढ़ाई करेगी और डॉक्टर बनने की दिशा में अपना कदम बढ़ाएगी।
सुविधाएं कम थीं, लेकिन हौसला बड़ा था
पूजा की सफलता उन विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणादायक है, जो संसाधनों की कमी को अपने सपनों के रास्ते की बाधा मान लेते हैं। पूजा ने साबित किया कि परिस्थितियां कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत निरंतर जारी रहे तो मंजिल हासिल की जा सकती है।
पूजा ने अपने पिता को हर दिन संघर्ष करते देखा और उसी संघर्ष को अपनी प्रेरणा बनाया। पिता गांव-गांव मेहनत करते रहे और बेटी किताबों के बीच अपने भविष्य की नींव मजबूत करती रही।
आज दोनों की मेहनत एक मुकाम पर आकर मिल गई है।
राजू चौहान की मेहनत ने बेटी पूजा के सपनों को पंख दिए और पूजा की मेहनत ने पिता के संघर्ष को एक नई पहचान दी।
खाचरौद की यह बेटी अब GMC रतलाम में MBBS की पढ़ाई कर डॉक्टर बनने की राह पर आगे बढ़ रही है। उसकी कहानी बताती है कि परिस्थितियां सपनों को कठिन जरूर बना सकती हैं, लेकिन दृढ़ संकल्प और मेहनत के सामने मंजिल असंभव नहीं होती।

By V meena

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