
रतलाम (ivnews ) शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार और शिक्षकों के सतत व्यावसायिक विकास की दिशा में कार्य कर रहे सांदीपनि विद्यालय विनोबा, रतलाम ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपलब्धि दर्ज कराई है। विद्यालय ने फिक्की समर्थित प्रतिष्ठित ‘अराइज अवॉर्ड’ के तीसरे चरण में प्रवेश करते हुए नई दिल्ली स्थित फिक्की मुख्यालय में राष्ट्रीय निर्णायक मंडल के समक्ष अपने मॉडल का प्रभावी प्रस्तुतिकरण किया।
विद्यालय की ओर से ‘टीचर्स प्रोफेशनल डेवलपमेंट’ श्रेणी में यह प्रस्तुतीकरण किया गया। चयन प्रक्रिया के प्रथम चरण में देशभर से हजारों विद्यालयों ने सहभागिता की थी। इसके बाद दूसरे चरण में दस्तावेजों के आधार पर चयन हुआ और तीसरे चरण के लिए प्रत्येक श्रेणी में चयनित विद्यालयों को अपने कार्यों एवं नवाचारों को राष्ट्रीय निर्णायक मंडल के समक्ष प्रस्तुत करने का अवसर मिला।
12 सितंबर को नई दिल्ली में हुआ प्रस्तुतिकरण
अराइज अवॉर्ड के तीसरे चरण का आयोजन 12 सितंबर को नई दिल्ली स्थित फिक्की मुख्यालय में हुआ। यहां सांदीपनि विद्यालय विनोबा के ‘स्कूल टीचर प्रोफेशनल डेवलपमेंट मॉडल’ को राष्ट्रीय ग्रैंड जूरी के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
विद्यालय के उप प्राचार्य एवं राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक गजेंद्र सिंह राठौर ने यह प्रस्तुतीकरण किया। उन्होंने विद्यालय में शिक्षकों के निरंतर विकास के लिए विकसित किए गए ‘साइकिल ऑफ ग्रोथ’ मॉडल की कार्यप्रणाली, सीखने की प्रक्रिया और विद्यालय स्तर पर उसके प्रभाव को विस्तार से सामने रखा।
शिक्षकों के सतत विकास पर विशेष फोकस
विद्यालय द्वारा शिक्षक व्यावसायिक विकास के लिए एक विशिष्ट दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है। इसमें देश-दुनिया के अग्रणी विद्यालयों की श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को साझा करने और उनसे सीखने पर विशेष जोर दिया जाता है।
इस मॉडल का उद्देश्य शिक्षकों को बदलती परिस्थितियों और नई पीढ़ी की आवश्यकताओं के अनुरूप निरंतर विकसित होने के लिए तैयार करना है। इसके माध्यम से विद्यालय में शिक्षकों के सीखने, प्रयोग करने और अपने शिक्षण अभ्यास को लगातार बेहतर बनाने के लिए एक सतत एवं मजबूत तंत्र विकसित किया जा रहा है।
राष्ट्रीय मंच पर हुए प्रस्तुतिकरण में मॉडल की निरंतरता, सीखने की प्रक्रिया तथा विद्यालय में इसके प्रभाव को प्रमुखता से रखा गया।
‘नई पीढ़ी के साथ शिक्षकों का विकास भी निरंतर होना चाहिए’
विद्यालय के उप प्राचार्य गजेंद्र सिंह राठौर ने कहा कि नई पीढ़ी के साथ शिक्षकों का विकास भी निरंतर होना आवश्यक है। उनका लक्ष्य ऐसा शैक्षिक वातावरण तैयार करना है, जिसमें शिक्षकों के सतत व्यावसायिक विकास के माध्यम से सीखने, प्रयोग करने और अपने अभ्यास को बेहतर बनाने की प्रक्रिया लगातार जारी रहे।
उन्होंने बताया कि विद्यालय अब सभी शिक्षकों के लिए शिक्षण प्रक्रिया में एआई उपकरणों के एकीकरण की दिशा में अगले चरण पर कार्य कर रहा है। इसके साथ ही शिक्षकों के लिए स्व-गति आधारित ऐसी प्रणाली विकसित की जा रही है, जो उद्यमी सोच को प्रोत्साहित करेगी।
विद्यालय की निरंतर विकास यात्रा में ‘साइकिल ऑफ ग्रोथ’ के साथ ‘द जेन साह मॉडल’ और ‘ब्रूडिंग इफेक्ट’ जैसे नवाचारों को भी जोड़ा जा रहा है।
26 सितंबर को होगा अवॉर्ड समारोह
इस उपलब्धि पर संस्था की प्राचार्य संध्या वोरा ने बताया कि अराइज अवॉर्ड के अंतिम चयन का परिणाम अभी प्रतीक्षित है। अवॉर्ड सेरेमनी का आयोजन 26 सितंबर को नई दिल्ली स्थित फिक्की मुख्यालय में किया जाएगा। अंतिम परिणाम के बाद विद्यालय की इस राष्ट्रीय स्तर की उपलब्धि की तस्वीर और स्पष्ट होगी।
