रतलाम (ivnews ) साल के 365 दिन और हर रोज एक पेंटिंग…. कुल 365 पेंटिग्स बनाना…. वह भी कक्षा 5 के छात्र द्वारा…. हर पेंटिंग्स का अलग अलग विषय…. आपको आश्चर्य लगेगा ना…. लेकिन यही कर दिखाया है रतलाम के जिष्णु दवे ने…. और उसकी यही उपलब्धि बन गई वर्ल्ड रिकार्ड….


गुरु रामदास पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल, रतलाम के कक्षा 5 के छात्र जिष्णु संजय दवे ने अपनी अद्भुत कला प्रतिभा से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर न केवल अपने विद्यालय का, बल्कि पूरे भारत का नाम रोशन किया है। मात्र 10 वर्ष की आयु में जिष्णु ने 1 अगस्त 2024 से 1 अगस्त 2025 तक लगातार हर दिन एक नई पेंटिंग बनाकर कुल 365 पेंटिंग्स की श्रृंखला पूर्ण की। इस अनूठी उपलब्धि को वेब बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, यूएसए बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड और एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड द्वारा आधिकारिक मान्यता प्राप्त हुई है।


बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के, जिष्णु ने केवल आत्मप्रेरणा, लगन और अनुशासन के बलबूते यह असाधारण कार्य कर दिखाया। उनकी पेंटिंग्स में देशभक्ति, प्राकृतिक दृश्य, देवी-देवता, महापुरुषों तथा कार्टून पात्रों की रचनात्मक झलक देखने को मिलती है।


इस ऐतिहासिक उपलब्धि के सम्मान में विद्यालय परिसर में एक समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर वेब वर्ल्ड रिकॉर्ड के जूरी सदस्य शैलेन्द्र सिंह सिसोदिया, धरम यादव और कमलेश जोशी ने संयुक्त रूप से जिष्णु को प्रमाण पत्र, मेडल एवं शील्ड प्रदान की।
जिष्णु के पिता, ज्योतिषाचार्य महर्षि संजय शिवशंकर दवे, ने इस सफलता पर कहा की पुत्र की निरंतरता और समर्पण की प्रशंसा की।
विद्यालय के सेक्रेटरी कश्मीर सिंह सोढ़ी ने जिष्णु को बधाई देते हुए कहा, “जिष्णु जैसे छात्र विद्यालय की पहचान होते हैं। उनकी उपलब्धि अन्य विद्यार्थियों को भी उत्कृष्टता की ओर प्रेरित करेगी।”
प्रबंधन सदस्य दलिप सिंह सोढ़ी एवं जोगिंदर सिंह सोढ़ी ने भी जिष्णु की सराहना करते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
विद्यालय की प्राचार्या
श्रीमती सुनीता राठौर ने कहा कि जिष्णु की यह उपलब्धि इस बात का उदाहरण है कि यदि सही दिशा और समर्थन मिले, तो बच्चे असंभव को भी संभव बना सकते हैं।
प्रधान अध्यापिका श्रीमती पूनम गांधी ने जिष्णु की नियमितता, सृजनात्मकता और समर्पण की सराहना करते हुए इसे विद्यालय के लिए गौरव की बात बताया।
समारोह का संचालन श्रीमती मीना बैरागी ने किया।
आभार श्रीमती इंदिरा शुक्ला ने माना.

By V meena

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