नई दिल्ली/भोपाल (ईएमएस)// पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी के पुत्र और पूर्व मंत्री दीपक जोशी के कांग्रेस में शामिल होने के बाद भाजपा हाईकमान ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और संगठन मंत्री हितानंद शर्मा को हिदायद दी है कि कार्यकर्ताओं को भरपूर सम्मान दें। भाजपा में कार्यकर्ता ही असली जान हैं। इस दौरान तीनों नेताओं को निर्देश दिया गया की वे हर वरिष्ठ नेता को भरपूर सम्मान दें। वहीं सूत्रों का कहना है कि हाईकमान ने शिवराज और वीडी शर्मा की हर गतिविधि पर पहरा बैठा दिया है। अब मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष की हर गतिविधि की रिपोर्ट संघ तैयार करेगा तथा उसे हर सप्ताह भाजपा मुख्यालय भेजेगा।

गौरतलब है कि शनिवार को पूर्व मंत्री दीपक जोशी ने जैसे ही कांग्रेस का हाथ थामा। भाजपा में बवाल मच गया। सूत्रों का कहना है कि हाईकमान ने मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष से जवाब तलब किया। उसके बाद दोनों की जमकर क्लास लगाई। आलाकमान की फटकार के बाद रविवार को शिवराज दिल्ली पहुंचे और शनिवार को जो घर के दीपक से आग लगी है, उसे बुझाने की कोशिश की।
सूत्रों का कहना है कि इस दौरान उन्होंने हाईकमान को विश्वास दिलाया कि मप्र में पार्टी 150 सीटें आसानी से जीत जाएगी। उधर सूत्रों का कहना है कि भाजपा में अभी और बगावत होगी। पार्टी के कई विधायक भी कांग्रेस नेताओं के संपर्क में हैं। कमलनाथ और कांग्रेस भाजपा विधायकों को कांग्रेस की सदस्यता दिलाने के लिए रणनीति के तहत खास मौके का इंतजार कर रहे हैं। जानकारों का कहना है कि 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया के बगावत के बाद जो कांग्रेस विधायक भाजपा में शामिल हुए हैं उनकी 29 सीटों पर नए और पुराने भाजपाईयों में लड़ाई तो चल ही रही है। इसके अलावा 13 अन्य सीटें भी हैं जिन पर भाजपा में बगावत सुलग रही है। बताया जाता है कि इनमें सर्वाधिक ग्वालियर-चंबल से सर्वाधिक संख्या है, जबकि बुंदेलखंड महाकौशल और मालवा निमाड़ अंचल से एक विधायक का नाम चर्चा में बना हुआ है।


आधा दर्जन विधायक कांग्रेस के संपर्क में
आक्रोशित भाजपा नेताओं के बयानों और पूर्व मंत्री दीपक जोशी द्वारा कांग्रेस का दामन थामने के बाद अब आधा दर्जन भाजपा विधायकों के भी कांग्रेस में शामिल होने की चर्चाएं जोर पकडऩे लगी हैं। इन चर्चाओं की वजह से भाजपा में हलचल मच गई है। संगठन व सरकार संभावित ऐसे विधायकों की तलाश में गुपचुप लग गई है। यह वे विधायक हैं, जो बीते तीन सालों से सरकार से बेहद नाराज चल रहे हैं।
इनमें से कुछ विधायकों पर तो सरकार व संगठन की नजर बीते कई दिनों से बनी हुई है, लेकिन इसमें से कुछ चेहरे ऐसे हैं जिनकी तलाश की जा रही है। यह विधायक मैहर विधायक के अलावा हैं। बताया जा रहा है कि इनमें कुछ विधायक तो सिंधिया समर्थक हैं, जबकि कुछ मूल रुप से भाजपाई हैं। इसके अलावा एक विधायक वह हैं जो दूसरे दल से आकर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर जीते हैं। इन विधायकों की बीते लंबे समय से कांग्रेस नेताओं से बात चल रही है। इंतजार सिर्फ कमलनाथ से टिकट मिलने के वादे का किया जा रहा है।


असंतुष्टों पर संगठन रखेगा निगाह
भाजपा में सिंधिया समर्थक मंत्रियों और नेताओं के खिलाफ बगावत कहीं पूरे प्रदेश में न फैल जाए, इसको लेकर अब संगठन उन नेताओं पर निगाह रखेगा, जो पार्टी को लेकर बयानबाजी कर सकते हैं। दूध से जला संगठन अब छाछ भी फूंक-फूंककर पी रहा है। संगठन ने ऐसे नेताओं पर निगाह रखने के लिए अपने मुखबिर तंत्र को एक्टिव किया है। दीपक जोशी के मामले में लगातार एक साल से ज्यादा समय से कांग्रेस में जाने की अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन विधानसभा चुनाव के 6-7 महीने पहले जिस तरह से भाजपा के वरिष्ठ नेता सत्यनारायण सत्तन और भंवरसिंह शेखावत ने मोर्चा खोला, उसको लेकर संगठन गंभीर है। यह ऐसे समय हुआ, जब भाजपा और संगठन के बड़े पदाधिकारी मप्र आकर बैठकें ले चुके थे और यहां तक कि राष्ट्रीय सहसंगठन मंत्री शिवप्रकाश, क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल, केन्द्रीय मंत्री और रूठे नेताओ मनाने के लिए भेजे गए। सूत्रों के अनुसार ऐसे असंतुष्ट नेता आपस में मिलकर एक धड़ा भी बना सकते है। कुछ तो कांग्रेस से आए नेताओं के कारण असंतुष्ट हैं। ( ईएमएस से साभार)

By V meena

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