रतलाम अपनी रचनाओं के माध्यम से देशभर में रतलाम का नाम रोशन करने वाले मरहूम शायर दानिश अलीगढ़ी की स्मृति में जनवादी लेखक संघ, रतलाम द्वारा स्थापित ‘दानिश अलीगढ़ी स्मृति सम्मान’ वर्ष 2024 के लिए देश की सुपरिचित कवियत्री प्रभा मुजुमदार को दिया जाएगा। उक्त निर्णय जनवादी लेखक संघ रतलाम की सम्मान समिति की बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता जलेसं अध्यक्ष रणजीत सिंह राठौर ने की ‌। सम्मान निर्धारण समिति में वरिष्ठ साहित्यकार प्रो रतन चौहान, युसूफ जावेदी एवं जनवादी लेखक संघ रतलाम के सचिव सिद्धीक़ रतलामी शामिल रहे ।
उक्त जानकारी देते हुए जलेसं कोषाध्यक्ष कीर्ति शर्मा ने बताया कि उस्ताद शायर दानिश अलीगढ़ी ने अपनी ग़ज़लों के माध्यम से पूरे देशभर में बहुत ऊंचा स्थान प्राप्त किया था। रतलाम में उनकी स्मृतियां बनी रहे , इस उद्देश्य से जनवादी लेखक संघ द्वारा प्रतिवर्ष उनकी याद में यह सम्मान प्रदान की शुरुआत की गई है। यह सम्मान प्रतिवर्ष जनवादी लेखक संघ उर्दू विंग प्रदेश कार्यसमिति सह प्रभारी सिद्दीक़ रतलामी द्वारा संयोजित होगा।

रतलाम में ही शिक्षित हैं प्रभा जी

दानिश अलीगढ़ी स्मृति सम्मान का यह तीसरा सोपान है। प्रथम सम्मान वर्ष 2022 के लिए वरिष्ठ कवि एवं भाषाविद डॉ. जयकुमार ‘जलज’ तथा दूसरे वर्ष 2023 का सम्मान वरिष्ठ कवि श्याम महेश्वरी को दिया गया था।
तीसरे सम्मान के लिए चयनित कवियत्री प्रभा मुजुमदार देश की महत्वपूर्ण रचनाकारों में शामिल हैं । प्रभा जी का जन्म 10 अप्रेल 1957, को इन्दौर में हुआ। रतलाम में ही उन्होंने एम.एससी. की शिक्षा प्राप्त की। पीएच.डी.(गणित) करने के बाद वे तेल एवम प्राकृतिक गैस आयोग में भूवैज्ञानिक के तौर पर 35 वर्ष कार्यकाल के बाद उप महाप्रबंधक (तेलाशय) के पद से मई 2017 में सेवानिवृत हो चुकी हैं। उनके 4 कविता संग्रह ‘अपने अपने आकाश’ (2003), ‘तलाशती हूँ जमीन’ (2010), ‘अपने हस्तिनापुरों में’ (2014) “सिर्फ स्थगित होते हैं युद्ध” (2019) प्रकाशित हुए हैं।
प्रभा जी को कविता के लिए गुजरात साहित्य परिषद , सृजनगाथा द्वारा डॉ श्रीकांत वर्मा पुरस्कार,शब्द निष्ठा अजमेर द्वारा कविता पुरस्कार, सृजनगाथा (छत्तीसगढ़) द्वारा सिंधु रथ पुरस्कार ,शब्द निष्ठा अजमेर द्वारा व्यंग्य के लिए पुरस्कार ,हिन्दी लेखिका संघ म. प्र. द्वारा रजत जयंती समारोह में काव्य संग्रह हेतु पुरस्कार,अविराम साहित्यिकी द्वारा समकालीन लघुकथा प्रतियोगिता पुरस्कार सहित कई पुरस्कार मिले हैं।
प्रभा जी की रचनाओं में स्त्री स्वर को प्रमुखता मिली है। वे स्वयं एक स्त्री होने के कारण उस भोगे हुए यथार्थ को सामने लाने से पीछे नहीं हटती। वे स्त्री की उस परवशता को भी कविता के ज़रिए सामने लाती है जो अमूमन कई सारे पर्दों के पीछे छुपी रह जाया करती है।
प्रभा जी को आगामी 25 अगस्त को जनवादी लेखक संघ रतलाम द्वारा आयोजित समारोह में उक्त सम्मान से सम्मानित किया जाएगा । बैठक में आशीष दशोत्तर, मांगीलाल नगावत, श्रीमती गीता राठौर, सहित सम्मान समारोह समिति के सदस्य मौजूद थे।

By V meena

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