
रतलाम ( ivnews ) डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें कथित पुलिस अधिकारियों ने एक कारोबारी को कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर ₹55 लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए। आरोपियों ने फर्जी एफआईआर, सुप्रीम कोर्ट के नाम पर तैयार किए गए कथित दस्तावेज और पुलिस की वर्दी में वीडियो कॉल का सहारा लेकर कारोबारी को अपने जाल में फंसाया। मामले में रतलाम पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। वहीं, ठगी की रकम में से करीब ₹20 लाख रुपये होल्ड करवाने में भी सफलता मिली है।
पुलिस के अनुसार, फरियादी मोटर पार्ट्स का व्यवसाय करते हैं और वर्तमान में कुवैत में कारोबार करते हैं। कुछ दिनों से वे रतलाम में रह रहे थे। 15 सितंबर 2026 को उनके मोबाइल पर एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को मुंबई के कोलाबा क्षेत्र का पुलिस अधिकारी बताया और फरियादी के मोबाइल नंबर, व्यवसाय तथा भारत में रहने को लेकर पूछताछ की।
इसके बाद आरोपी ने एक अन्य मोबाइल नंबर का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि उसका इस्तेमाल पाकिस्तान की आईएसआई से जुड़े एजेंट से बातचीत के लिए किया गया है। अलग-अलग मोबाइल नंबरों से फोन कर खुद को पुलिस अधिकारी और वरिष्ठ निरीक्षक बताने वाले लोगों ने फरियादी को उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की बात कही।
आरोपियों ने आधार कार्ड और पैन कार्ड से जुड़ी जानकारी भी हासिल की। कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर फरियादी को मानसिक दबाव में लेने का प्रयास किया गया।
वीडियो कॉल पर पुलिस की वर्दी, सुप्रीम कोर्ट के नाम पर फर्जी दस्तावेज
16 सितंबर को आरोपियों ने कथित तौर पर फरियादी की कॉल एटीएस विभाग में ट्रांसफर करने का नाटक किया। इसके बाद व्हाट्सऐप वीडियो कॉल पर पुलिस की वर्दी पहने व्यक्तियों से बात कराई गई। आरोपियों ने हथियारों से संबंधित तस्वीरें भेजकर उनमें मौजूद लोगों की पहचान करने को कहा।
इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के लेटरहेड पर तैयार किए गए कथित दस्तावेज भी भेजे गए। इन दस्तावेजों के जरिए फरियादी को विश्वास दिलाया गया कि उनके खिलाफ गंभीर मामला दर्ज है और उन्हें जांच का सामना करना पड़ेगा।
रकम जमा कराने के बाद वापस लौटाने का दिया झांसा
आरोपियों ने फरियादी को बताया कि जांच और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए निर्धारित बैंक खातों में रकम जमा करानी होगी। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि सत्यापन पूरा होते ही पूरी राशि वापस कर दी जाएगी।
कथित पुलिस कार्रवाई के डर और रकम वापस मिलने के भरोसे में आकर फरियादी ने विभिन्न बैंक खातों में आरटीजीएस के माध्यम से कुल ₹55 लाख ट्रांसफर कर दिए। बाद में ठगी का पता चलने पर मामले में थाना माणकचौक में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की गई।
बैंक खातों की कड़ियां जोड़कर हैदराबाद और धारवाड़ पहुंची पुलिस
पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के निर्देशन में थाना माणकचौक और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने बैंक खातों, ट्रांजेक्शन और तकनीकी साक्ष्यों की जांच की। शुरुआती जांच में एक्सिस बैंक के एक खाते में फरियादी द्वारा ट्रांसफर की गई ₹35 लाख की राशि का पता चला। बैंक से मिली जानकारी के अनुसार, यह खाता SRI VENKATESHWARA PRI LIMITED नामक कंपनी से संबंधित था।
जांच के आधार पर पुलिस टीम हैदराबाद पहुंची और वहां से कोडारी वेंकटेश को गिरफ्तार किया। इसके बाद बैंक खातों से संबंधित कड़ियों के आधार पर कर्नाटक के धारवाड़ से अशोक अन्यया को गिरफ्तार किया गया।
विवेचना में दूसरे स्तर पर ₹5,00,084 की राशि ट्रांसफर होने की जानकारी सामने आने पर पुलिस ने मीर यूसुफ को भी गिरफ्तार किया।
तीन आरोपी गिरफ्तार, करीब ₹20 लाख होल्ड
रतलाम पुलिस के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान ठगी की रकम में से करीब ₹20 लाख रुपये संबंधित बैंक खातों में होल्ड करवाए गए हैं। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि ठगी की रकम किन-किन खातों में पहुंचाई गई और इसे निकालने या आगे ट्रांसफर करने में अन्य कौन लोग शामिल हैं।
गिरफ्तार आरोपी
कोडारी वेंकटेश — तेलंगाना निवासी।
अशोक अन्यया — मराठा कॉलोनी, धारवाड़, कर्नाटक निवासी।
मीर यूसुफ — चारमीनार, मदीना नगर, हैदराबाद निवासी।
कार्रवाई में थाना प्रभारी माणकचौक निरीक्षक विक्रम सिंह चौहान, साइबर सेल प्रभारी उपनिरीक्षक जीवन बारिया, उपनिरीक्षक मुकेश यादव, प्रधान आरक्षक दिनेश जाट, प्रधान आरक्षक रितेश पाटीदार, आरक्षक राहुल पाटीदार, आरक्षक रितेश चौधरी और महिला आरक्षक वर्षा पाटीदार की सराहनीय भूमिका रही।
