रतलाम एक पटवारी ने सरकारी दस्तावेजों में हेरफेर करके दूसरे की जमीन का नामन्तरन आऱोपी किसान के नाम कर दिया। जिला न्यायालय के तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश लक्ष्मण कुमार वर्मा ने पटवारी ओर आऱोपी किसान को इस मामले में दोषी पाए जाने पर सात सात वर्ष के3 कठोर कारावास को सजा सुनाई।

जिला न्यायालय के सहायक लोक अभियोजक संजीव सिंह चौहान ने बताया कि वर्ष 2008 से 2010 के दौरान ग्राम मूंदडी में पटवारी के रुप में पदस्थ रहे रमेश चन्द्र पिता पीरुजी गेहलोत ने मूंदडी निवासी नानालाल पिता नाहरसिंह के कहने पर सर्वे क्र.411 और 412 की भूमि पर वास्तविक भूमिस्वामियों के नाम हटाकर नानालाल का नाम दर्ज कर दिया था। पटवारी ने इस नामांतरण के लिए सक्षम प्राधिकारी से कोई अनुमति प्राप्त नहीं की थी,और षडयंत्र पूर्वक शासकीय अभिलेखों में कूटरचना कर हेरफेर कर दिया गया था।
उक्त भूमि की वास्तविक भूमिस्वामी फूलीबाई पति शंभू भील नि. मूंदडी को जब जमीन के रेकार्ड से स्वयं का नाम हटने की जानकारी मिली तो उसने इस बात की शिकायत एसडीएम व अन्य उच्चाधिकारियों को की थी। फूलीबाई ने पटवारी रमेशचन्द्र गेहलोत और नानालाल के अतिरिक्त कांतिलाल छाजेड,चैनराम मदन गायरी इत्यादि के विरुद्ध भी शिकायत की थी। फूलीबाई की शिकायत की जांच के बाद शासकीय दस्तावेजों में बगैर सक्षम अनुमति के फेरफार किए जाने का तथ्य सामने आने के बाद पटवारी रमेशचन्द्र गेहलोत को निलम्बित कर दिया गया तथा साथ ही मामले में पुलिस प्रकरण दर्ज करने हेतु बिलपांक पुलिस थाने को प्रतिवेदन दिया गया था।
बिलपांक थाने पर अभियुक्तों के खिलाफ भादवि की धारा 466,467,471,120 बी और 477 के अन्तर्गत प्रकरण दर्ज कर पुलिस ने अभियुक्तों के विरुद्ध चालान प्रस्तुत किया था। प्रकरण के विचारण के पश्चात जिला न्यायालय के तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश लक्ष्मण वर्मा ने अपर लोक अभियोजक संजीव सिंह चौहान द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और तर्को के आधार पर पटवारी रमेशचन्द्र गेहलोत तथा कृषक नानालाल पिता नाहरसिंह को दोषसिद्ध करार दिया। दोनो अभियुक्तों को विभिन्न धाराओं में पांच पांच और सात सात वर्ष के कारावास और अर्थदण्ड की सजा सुनाई गई है। सभी सजाएं एकसाथ चलेगी।

By V meena

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