
प्रतीकात्मक फोटो
रतलाम ( ivnews )शहर में मोबाइल सिम जारी करने के नाम पर चल रहे कथित फर्जीवाड़े का पुलिस ने खुलासा किया है। ऑपरेशन फॉस्ट 2.0 के तहत हुई जांच में सामने आया कि कुछ लोगों के आधार कार्ड का इस्तेमाल कर उनके नाम पर ऐसी सिम जारी की गईं, जिनका उपयोग बाद में ऑनलाइन धोखाधड़ी में किया गया। उपभोक्ताओं से मिली शिकायतों और उनके बयानों के आधार पर स्टेशन रोड थाना पुलिस ने एसएम मोबाइल, छत्रीपुल के संचालक मोहम्मद इमरान छिपा के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार आरोपी के खिलाफ धारा 318(4) बीएनएस एवं 66(सी) आईटी एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है।
जिसने सिम ली ही नहीं, उसके नाम पर दो नंबर जारी
जांच के दौरान पुलिस ने उन उपभोक्ताओं के बयान दर्ज किए, जिनके नाम पर संदिग्ध सिम जारी हुई थीं।
अर्जुननगर निवासी कृष्णा राठौर ने पुलिस को बताया कि उनके नाम से दो मोबाइल नंबर जारी हुए हैं, जबकि उन्होंने इनमें से कोई भी सिम नहीं खरीदी। उन्हें इन दोनों सिम कार्ड के बारे में कोई जानकारी तक नहीं थी।
300 रुपये के लालच में आधार पर निकलवा ली दो सिम
मीडटाउन कॉलोनी निवासी प्रणव धाकड़ ने पुलिस को बताया कि कुछ माह पहले वह छत्रीपुल से गुजर रहे थे। इसी दौरान एक युवक और महिला ने उनसे संपर्क किया। उन्होंने उनके नाम से सिम निकलवाने के बदले 300 रुपये प्रति सिम देने की बात कही।
पैसों के लालच में प्रणव ने अपने आधार कार्ड से एसएम मोबाइल दुकान से एयरटेल की दो सिम निकलवा दीं। इसके बदले उसे 600 रुपये दिए गए। प्रणव के मुताबिक उसने उन सिम का कभी इस्तेमाल नहीं किया और बाद में वे सिम कहां गईं, इसकी उसे कोई जानकारी नहीं है।
दोस्ती के नाम पर सिम ली, आगे क्या हुआ पता ही नहीं
इसी तरह आम्बा, थाना पिपलौदा निवासी दिलीप मकवाना ने बताया कि उसके दोस्त रवि ने उसके नाम से एक सिम कार्ड दिलाने के लिए कहा था। रतलाम आने पर रवि और उसका दोस्त उसे साथ लेकर आए। उन्होंने नाश्ता कराया और 200 रुपये दिए। इसके बाद दिलीप ने अपने आधार कार्ड से सिम निकलवा दी।
दिलीप के मुताबिक बाद में उस सिम का क्या इस्तेमाल हुआ, इसकी उसे जानकारी नहीं थी।
संदिग्ध सिम का कनेक्शन ऑनलाइन ठगी से
पुलिस जांच में सामने आया कि इस तरह जारी की गई अन्य संदिग्ध सिमों का इस्तेमाल ऑनलाइन धोखाधड़ी में किया गया। इन मामलों की शिकायतें नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर भी दर्ज की गई थीं।
शिकायतों के आधार पर पुलिस ने सिम जारी होने की प्रक्रिया, संबंधित दस्तावेजों और उपभोक्ताओं के बयानों की जांच की। जांच में पुलिस ने पाया कि उपभोक्ताओं के साथ कथित धोखाधड़ी कर उनके दस्तावेजों के आधार पर फर्जी तरीके से सिम जारी की गईं और इनका इस्तेमाल ऑनलाइन ठगी में हुआ।
ऑपरेशन फॉस्ट 2.0 के तहत कार्रवाई
संदिग्ध सिम विक्रेताओं, धारकों और एजेंटों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश के बाद पुलिस ने ऑपरेशन फॉस्ट 2.0 के तहत यह जांच शुरू की थी। अब पुलिस मामले में यह पता लगाने में जुटी है कि कितनी सिम इस तरह जारी की गईं, उनका इस्तेमाल किन-किन मामलों में हुआ और इस नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं।फर्जी सिम के जरिए साइबर ठगी का यह मामला सामने आने के बाद पुलिस की जांच का दायरा बढ़ गया है।
