
रतलाम (IVNews)। आई.डी.बी.आई. बैंक, रतलाम से ₹1 करोड़ 21 लाख के गबन के चर्चित मामले में न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए बैंक के तत्कालीन कैशियर सुरेश मीणा को 10 वर्ष के कठोर कारावास और ₹50 हजार के जुर्माने की सजा सुनाई है। फैसला सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश राजेश नामदेव की अदालत ने सुनाया।
अभियोजन के अनुसार आरोपी सुरेश पिता बद्रीप्रसाद मीणा (30 वर्ष), निवासी ग्राम माचड़ी, जिला करौली (राजस्थान), आई.डी.बी.आई. बैंक, नाहरपुरा शाखा में कैशियर के पद पर कार्यरत था। बैंक में नकदी का मिलान होने पर ₹1.46 करोड़ होना चाहिए था, लेकिन कैश में केवल ₹25.39 लाख ही मिले। जांच में ₹1.21 करोड़ की भारी कमी सामने आने पर बैंक प्रबंधन ने थाना माणक चौक में मामला दर्ज कराया।
पूछताछ के दौरान आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने अलग-अलग दिनों में बैंक के कैश काउंटर और सेफ डिपॉजिट वॉल्ट से नकदी निकालकर गबन किया। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि उसने अपनी बहन के बैंक खाते और मोबाइल नंबर का उपयोग करते हुए PhonePe और Paytm के जरिए रकम का लेन-देन किया तथा रिश्तेदारों के खातों में भी लाखों रुपये ट्रांसफर किए। पूछताछ में रिश्तेदारों ने बताया कि आरोपी ने उन्हें जमीन बेचने का बहाना बनाकर रकम उनके खातों में डलवाई और बाद में वापस अपने खाते में ट्रांसफर करवा ली।
ऑनलाइन सट्टा ऐप में झोंक दिए करीब 80 लाख रुपये
जांच के दौरान सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि आरोपी ने गबन की गई रकम में से करीब ₹79.79 लाख ऑनलाइन सट्टा ऐप में लगा दिए। बैंक के सीसीटीवी फुटेज में वह बैंक बंद होने के बाद काउंटर के नीचे से नोटों की गड्डियां बैग में भरकर ले जाता दिखाई दिया। वहीं एस.बी.आई. एटीएम के सीसीटीवी फुटेज में भी वह बड़ी मात्रा में नकदी जमा करते हुए नजर आया।
70 लाख की मांग ने खोला करोड़ों के गबन का राज
अपर लोक अभियोजक समरथ पाटीदार ने बताया कि आई.डी.बी.आई. बैंक में जिला सहकारी बैंक का खाता था। जब जिला सहकारी बैंक ने ₹70 लाख नकद की मांग की तो कैशियर ने राशि देने से मना कर दिया। इस पर शाखा प्रबंधक ने रीजनल ऑफिस इंदौर को सूचना दी। रीजनल ऑफिस की टीम द्वारा स्टाफ की मौजूदगी में नकदी का सत्यापन किया गया, जिसमें ₹1.21 करोड़ की कमी सामने आई और पूरे गबन का खुलासा हो गया।
15 अगस्त 2023 से जेल में है आरोपी
मामले की जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने न्यायालय में चालान पेश किया। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज, बैंक रिकॉर्ड और अन्य प्रमाणों के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास एवं ₹50 हजार के अर्थदंड से दंडित किया। आरोपी 15 अगस्त 2023 से न्यायिक हिरासत में जेल में बंद है।
