रतलाम ( ivnews ) बाजार बैठक का प्रस्ताव नगर निगम अधिनियम की धाराओं के विपरीत है , मेयर इन काउंसिल द्वारा दिनांक 4.3.25 को स्वीकृत प्रस्ताव क्रमांक 135 का कार्य सूची में उल्लेख न करना परिषद की अवमानना तथा जनता से छल कपट और धोखाधड़ी है । कांग्रेस नेताओं ने निगम आयुक्त हिमांशु भट्ट को इस संदर्भ में चर्चा करने के बाद ज्ञापन दिया ।

इस अवसर पर पूर्व विधायक पारस सकलेचा , नेता प्रतिपक्ष शांतिलाल वर्मा , उपनेता प्रतिपक्ष कमरुद्दीन कछवाय , वरिष्ठ पार्षद यास्मीन शेरानी , सलीम मोहम्मद बागवान , वसीम अली , रजनीकांत व्यास , हितेश पेमाल , तथा शाकिर खान उपस्थित थे ।

पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने चर्चा में कहा कि राजपत्र क्रमांक 25 दिनांक 20/7/2025 के नियम 19 में लिखा है कि कोई भी नया प्रस्ताव कार्य सूची में उल्लेखित विषय के संबंध में ही दिया जा सकता है , जबकि बाजार बैठक वसूली का महापौर द्वारा पेश मौखिक प्रस्ताव किसी भी विषय से संबंधित नहीं है ।

सकलेचा ने कहा कि 4/3/2025 को एमआईसी‌ से स्वीकृत प्रस्ताव को एजेंडे में शामिल नहीं करना तथा उसे मौखिक रूप से पेश करना , सोची समझी साजिश तथा बहुत बड़ा षड्यंत्र है । महापौर जी द्वारा वर्ष 2024-25 के बजट‌ सत्र में भी इसी प्रकार से 750 ट्यूबवेल की मोटर का विद्युत बिल लगभग 9 लाख प्रतिमाह मोहल्ला समिति से वसूलने का प्रस्ताव पारित किया गया था ।

ज्ञापन में कहा गया कि परिषद में महापौर जी ने कहा कि बाजार बैठक वसूली करना इसलिए आवश्यक है कि 15वें वित्त आयोग ने हमारे 7.50 करोड़ रोक लिए हैं । तथा भविष्य में भी अनुदान प्राप्त नहीं होगा , तथा 17000 लोग सड़क पर , फुटपाथ पर व्यापार कर रहे हैं । दोनों बिंदु का प्रस्ताव की भूमिका में उल्लेख नहीं होने से स्पष्ट है कि महापौर जी सफेद झूठ बोल रहे हैं ।

ज्ञापन में बताया गया की 2025-26 के बजट में 104 मद के आंकड़ों में काफी हेराफेरी है , जो किसी गंभीर आर्थिक अनियमितता की ओर इशारा करती है । दिसंबर 2023 में दिखाई गई करोड़ों की आय तीन माह बाद मार्च 2024 में शून्य हो गई । वह करोड़ों की राशि कहां चली गई ।

चर्चा में आयुक्त ने कहा कि कुछ धाराओं में कांग्रेस की व्याख्या से वह सहमत नहीं है , तथा परिषद में महापौर जी द्वारा दिए गए कथन , उनके द्वारा कराए गए निजी सर्वे तथा ज्ञान अनुसार हो सकते है । बजट की राशि में विरोधाभास का वे विश्लेषण करेंगे , तथा ज्ञापन को अध्ययन के बाद आवश्यक हुआ तो उच्च अधिकारीयों से राय के लिए भोपाल भेज दिया जाएगा ।

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