रतलाम/ताल (IVNEWS) रतलाम जिले के ताल क्षेत्र में बिजली कंपनी की कथित लापरवाही से युवा किसान विनोद धाकड़ की करंट लगने से मौत के बाद जमकर बवाल हुआ। आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने शव रखकर करीब 12 घंटे तक प्रदर्शन किया। जिला पंचायत सदस्य डीपी धाकड़ और करणी सेना प्रमुख जीवन सिंह शेरपुर भी प्रदर्शन में शामिल हुए और रातभर ग्रामीणों के साथ डटे रहे। देर रात करीब 3 बजे बिजली कंपनी की ओर से 18 लाख रुपये मुआवजा देने और पुलिस द्वारा संबंधित जूनियर इंजीनियर (जेई) व लाइनमैन के खिलाफ प्रकरण दर्ज किए जाने के बाद मामला शांत हुआ। इसके बाद सोमवार सुबह मृतक का अंतिम संस्कार किया गया।
पोल पर चढ़ाया, हाईटेंशन लाइन चालू रहने से गई जान!
मामला ताल के नजदीक कड़वाखेड़ी गांव का है। जानकारी के अनुसार, गांव में बिजली बंद होने की शिकायत के बाद फॉल्ट सुधारने के लिए आउटसोर्स कर्मचारी के रूप में काम करने वाले किसान विनोद धाकड़ को दोपहर करीब 3 बजे बिजली के पोल पर चढ़ाया गया था।
आरोप है कि इस दौरान विनोद को न तो पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए और न ही जरूरी सुरक्षा संबंधी जानकारी दी गई। घरेलू बिजली सप्लाई बंद की गई, लेकिन ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन लाइन की सप्लाई चालू रही। इसी दौरान करंट की चपेट में आने से विनोद की मौके पर ही मौत हो गई।
घटना के बाद परिवार और ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। पुलिस शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल ले गई, लेकिन ग्रामीणों ने बिजली कंपनी के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और पीड़ित परिवार को पर्याप्त मुआवजा देने की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।
डीपी धाकड़ बोले—अंतिम संस्कार से पहले मिले न्याय
घटना की जानकारी मिलने पर जिला पंचायत सदस्य डीपी धाकड़ शाम करीब 4 बजे मौके पर पहुंचे। उन्होंने बिजली कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों को बुलाने और जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
धाकड़ ने आरोप लगाया कि बिजली कंपनी आउटसोर्स कर्मचारियों से जोखिम भरे काम करवा रही है, जबकि उन्हें पर्याप्त प्रशिक्षण, सुरक्षा उपकरण और हादसे की स्थिति में बीमा जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि बिजली आपूर्ति बंद करने जैसी बुनियादी सुरक्षा प्रक्रिया में भी लापरवाही गंभीर सवाल खड़े करती है।
उन्होंने जिले में बिजली संबंधी हादसों में युवाओं की लगातार हो रही मौतों पर चिंता जताते हुए पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की।
जीवन सिंह शेरपुर की एसडीएम से तीखी बहस
प्रदर्शन के दौरान करणी सेना प्रमुख जीवन सिंह शेरपुर भी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों के साथ धरने पर बैठ गए। देर शाम तक कोई ठोस निर्णय नहीं होने पर रात करीब 9 बजे एसडीएम विवेक सोनकर और जीवन सिंह शेरपुर के बीच तीखी बहस हो गई।
शेरपुर ने पीड़ित परिवार को न्याय मिलने में हो रही देरी पर नाराजगी जताई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बिजली कंपनी ने तत्काल समाधान नहीं किया तो जिले में बिजली वितरण ट्रांसफॉर्मरों (डीपी) को आग लगाने जैसा कदम उठाने की बात कहते हुए आंदोलन तेज किया जाएगा।
स्थिति गर्माने पर मौके पर मौजूद लोगों ने दोनों पक्षों को शांत कराया। इसके बावजूद ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे और शव का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया।
रात 3 बजे तक चला धरना, 18 लाख मुआवजे पर सहमति
मृतक के शव के पास ही डीपी धाकड़, जीवन सिंह शेरपुर और अन्य ग्रामीण रातभर धरने पर बैठे रहे। प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शन समाप्त कराने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीण जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे।
आखिरकार रात करीब 3 बजे बिजली कंपनी की ओर से मृतक के परिवार को 18 लाख रुपये मुआवजा देने की बात सामने आई। संबंधित जूनियर इंजीनियर के खिलाफ जांच के आदेश दिए गए। वहीं, पुलिस ने जूनियर इंजीनियर और लाइनमैन दोनों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया।इसके बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ और सोमवार सुबह परिवार ने विनोद धाकड़ का अंतिम संस्कार किया।
बिजली कंपनी की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस घटना ने बिजली लाइन की मरम्मत के दौरान सुरक्षा इंतजामों, आउटसोर्स कर्मचारियों के प्रशिक्षण और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी दूसरे परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।

By V meena

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