रतलाम (IVNEWS)। टेलीग्राम पर ऑनलाइन घड़ियां बेचकर मोटा मुनाफा कमाने का लालच एक मजदूर को भारी पड़ गया। साइबर ठगों ने पहले रजिस्ट्रेशन फीस के नाम पर महज 10 हजार रुपये जमा करवाए और जब मुनाफे का भरोसा दिलाकर विश्वास जीत लिया, तो धीरे-धीरे अलग-अलग बैंक खातों में रकम जमा करवाते रहे। इस तरह फरियादी से कुल 6 लाख 43 हजार 285 रुपये की ठगी कर ली गई।
मामले में रतलाम पुलिस ने साइबर तकनीक और बैंकिंग लेन-देन के आधार पर जांच करते हुए उत्तराखंड और राजस्थान से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 28 हजार रुपये नकद और मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। पुलिस अब ठगी की रकम की रिकवरी के साथ गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है।
टेलीग्राम पर आया मैसेज और शुरू हुआ ठगी का खेल
पुलिस के मुताबिक फरियादी मजदूरी का काम करता है और अपने मोबाइल पर टेलीग्राम का उपयोग करता है। 29 दिसंबर 2025 को मजदूरी के दौरान उसके टेलीग्राम पर एक अज्ञात आईडी से संदेश आया। इसमें ऑनलाइन घड़ियां सेल करने और घर बैठे मुनाफा कमाने का लालच दिया गया।
आरोपियों ने फरियादी को ऑनलाइन काम करने के लिए वेबसाइट का लिंक, आईडी और पासवर्ड दिया। इसके बाद रजिस्ट्रेशन फीस के नाम पर एक बैंक खाते में 10 हजार रुपये जमा करवाए गए।
पहले दिखाया मुनाफा, फिर बढ़ता गया रकम जमा करने का सिलसिला शुरुआत में फरियादी को ऑनलाइन घड़ियां बेचने के बदले मुनाफा मिलने की जानकारी दी गई। इससे उसे आरोपियों पर भरोसा हो गया। ठगों ने इसी भरोसे का फायदा उठाते हुए अगला दांव खेला।
आरोपियों ने अलग-अलग बैंक खातों में रकम जमा करने पर डबल मुनाफा मिलने का झांसा दिया। मुनाफे के लालच में फरियादी ने आरोपियों द्वारा बताए गए विभिन्न बैंक खातों में अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए कुल ₹6,43,285 जमा कर दिए।
लेकिन जब रकम लाखों में पहुंच गई तो आरोपियों ने मुनाफा देना तो दूर, मूल रकम लौटाने से भी इनकार कर दिया। इसके बाद फरियादी को अपने साथ हुई साइबर ठगी का पता चला।
बैंक खातों और डिजिटल सुरागों से पुलिस आरोपियों तक पहुंची
शिकायत मिलने के बाद थाना औद्योगिक क्षेत्र जावरा में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विवेक कुमार लाल के मार्गदर्शन में साइबर सेल रतलाम और थाना औद्योगिक क्षेत्र जावरा पुलिस ने जांच शुरू की।
पुलिस टीम ने साइबर तकनीकी साक्ष्यों, बैंक खातों में हुए लेन-देन और उपलब्ध डिजिटल जानकारी का बारीकी से विश्लेषण किया। जांच के दौरान ठगी में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों और डिजिटल गतिविधियों से पुलिस को आरोपियों के संभावित ठिकानों की जानकारी मिली।
हरिद्वार और कोटा से दबोचे गए आरोपी
लगातार प्रयास के बाद पुलिस ने अश्वनी अरोरा पिता रोशन लाल, निवासी राजा गार्डन, जगजीतपुर, हरिद्वार, उत्तराखंड को हरिद्वार से गिरफ्तार किया।
वहीं दूसरे आरोपी अनिमेष जैन पिता वीरेंद्र कुमार जैन, निवासी हाथीदिलोद, जिला बारां, राजस्थान को कोटा से गिरफ्तार किया गया।
दोनों आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने ₹28,000 नकद और मोबाइल फोन जब्त किए हैं।
गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचने में जुटी पुलिस
पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है। पूछताछ में साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल किए गए बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, अन्य सहयोगियों, रकम के लेन-देन और संभावित अन्य पीड़ितों के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है।
पुलिस का फोकस अब ठगी की रकम की रिकवरी और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों तक पहुंचने पर है। मामले में आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।

By V meena

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